Present form of student politics has become completely rotten : Youth For Swaraj (On JNU Clash)

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Youth for Swaraj
Press Note: 24.04.2018

Present form of student politics has become completely rotten: Youth For Swaraj

A yet another controversy and reported clashes between the students of two organizations inside the campus of JNU has once again brought to the surface
outdatedness and hollowness of the so-called flag-bearers of ideology politics.While there are allegations being made about on each other from both sides, the
whole incident points singularly in the direction of how our current student politics has distanced itself from the real issues of student interests and making a
constructive contribution towards the cause of idea-creation and society.

While university campuses are meant to be the places of debate, discussion, and dissent; the so-called current ideological guards have turned them into the mirror reflecting all the ill-elements of society from open and unchecked (by the administration)hooliganism to spreading the fake communal agenda; all in the name of ideology. While Youth4Swaraj isn’t commenting on the merits of the
recent clash, we firmly opine that the present form of student politics has become completely rotten and the common students have become frustrated of it. In such
a scenario, when there is an urgent need for pronouncing the interests and aspirations of youth of the country, the incapability of the presently established organizations has created a void that needs to be filled by a fresh approach combining the interests of common students and freeing the political discussions from the cage of expired ideas of twentieth century. And Youth4Swaraj is committed working towards filling this space.
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यूथ फॉर स्वराज
प्रेस नोट: 28.4.2018

विचारधारा के कठोर बंधन ने और छात्र राजनीति के अक्षमताओं ने एक शून्य को जन्म दिया है : यूथ फॉर स्वराज

जेएनयू परिसर में दो छात्र संगठनों के संघर्ष और आपसी मुठभेड़ से उपजी तनातनी की एक और खबर ने एक बार फिर से हमारे तथाकथित ‘विचारधारा के ध्वजवाहकों’ के खोखलेपन को सतह पर लाने का काम किया है। जबकि इस घटना पर दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है, निरंतर दोहराये जा रहे ऐसे मामले इस बात की बानगी देते हैं कि वर्तमान छात्र राजनीति ने अपने छात्र हितों से संबंधित मुद्दों को उठाने और नए विचारों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के अपने बुनियादी काम से खुद को परे कर लिया है। जबकि विश्वविद्यालय परिसर स्वस्थ चर्चा और बहस की जगह होते हैं, हमारे तथाकथित विचारधारा के संरक्षकों की कारगुजारियों ने इन्हें तमाम असामाजिक और निचले किस्म की राजनीति करने का गढ़ बना दिया है। 

 
यूथ4स्वराज एक जिम्मेवार संगठन होने का फर्ज निभाते हुए इस मुद्दे की मेरिट्स पर टिप्पणी करने से बचते हुए अपना ये स्पष्ट मत रखता है कि वर्तमान स्वरूप में छात्र राजनीति पूरी तरह से दूषित हो चुकी है और आम छात्र इससे बुरी तरह हतोत्साहित हैं। इस परिदृश्य में जहाँ एक ओर युवा भारत के हितों और आकांक्षाओं की आवाज को पुरजोर करने की आवश्यकता है, ऐसे में वर्तमान में स्थापित छात्र संगठनों की भटकी प्राथमिकताओं और उनकी अक्षमताओं ने एक शून्य को जन्म दिया है जिसको केवल एक नई सोच के द्वारा भरा जा सकता है जो छात्र-केंद्रित हो और जो राजनीतिक विमर्श को बीसवीं सदी के मृत विचारों के पिंजरे से बाहर निकालकर एक नई दिशा देने की ओर प्रतिबद्ध हो। और यूथ4स्वराज निरंतर इसी उद्देश्य के साथ समर्पित रूप से कार्य करने में जुटा है। 

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